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रक्त-अक्षर
"क्या होगा जब आपको पता चले कि आपकी ज़िंदगी आपका नहीं, बल्कि किसी अदृश्य लेखक द्वारा लिखा गया एक 'त्रासदीपूर्ण' उपन्यास है, और आप उस कहानी को मिटाने की कोशिश में खुद ही अपना अस्तित्व खो रहे हैं?"
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'शून्य का व्याकरण' एक मनोवैज्ञानिक और पैरानॉर्मल थ्रिलर है, जो एक प्रसिद्ध लेखक अद्वैत के इर्द-गिर्द घूमती है। हिमालय की एक रहस्यमयी गुफा में उसे एक प्राचीन पांडुलिपि मिलती है, जिसे खोलते ही उसकी वास्तविकता के साथ खिलवाड़ शुरू हो जाता है। धीरे-धीरे अद्वैत को एहसास होता है कि वह जो भी लिख रहा है या जी रहा है, वह असल में किसी और की लिखी हुई एक डरावनी कहानी का हिस्सा है। वह अपनी मर्जी से कुछ भी करने में असमर्थ है, और जैसे-जैसे वह इस अदृश्य जाल से बाहर निकलने की कोशिश करता है, उसका अपना अस्तित्व शब्दों और स्याही के धब्बों में बदलने लगता है। क्या अद्वैत इस 'लेखक' के चंगुल से आज़ाद हो पाएगा, या वह एक अंतहीन और भयावह कहानी का पात्र बनकर रह जाएगा? यह कहानी वास्तविकता और भ्रम की धुंधली रेखाओं को चुनौती देती है।
अध्याय
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