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साइबर क्राइम थ्रिलर कहानी
एक फोन कॉल में मास्टरजी की चालीस साल की बचत खत्म हो गई। लेकिन साइबर ठग यह भूल गया था कि उसने जिस आदमी को शिकार बनाया है, वह गणित का शिक्षक है—और मास्टरजी हर सवाल का आधार खोजने में माहिर हैं।
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आलोक नाथ, जिन्हें पूरा मोहल्ला मास्टरजी कहता है, अपनी बेटे आकाश की शादी के लिए 25 लाख रुपये बचाकर रखते हैं। एक दिन बैंक अधिकारी बनकर आए फोन कॉल में उन्हें डिजिटल KYC के नाम पर OTP देने के लिए मजबूर किया जाता है और कुछ ही मिनटों में उनका पूरा बैंक बैलेंस साफ हो जाता है।
पुलिस इसे एक सामान्य साइबर फ्रॉड मानती है, लेकिन मास्टरजी को इस ठगी में कुछ ऐसा दिखाई देता है जो बाकी लोगों से छूट गया—अपराधी उनके बैंक खाते से ज्यादा उनके निजी जीवन को जानता था।
3:42 की कॉल, बेटे की शादी, घुटनों का दर्द और एक रहस्यमय डिजिटल सुराग मास्टरजी को अपने अतीत तक ले जाते हैं, जहाँ उन्हें अपने सबसे होनहार पुराने छात्र आर्यन का नाम दिखाई देता है। लेकिन अपराधी तक पहुँचने के लिए मास्टरजी को इस बार पुलिस की नहीं, अपने शिक्षक वाले दिमाग की जरूरत है।
अध्याय
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